

बड़ी खबर | ₹30 का ‘महायुद्ध’: 1.5 मिलियन फॉलोअर्स वाली यूट्यूबर अश्वी यादव परिवार समेत गिरफ्तार
इटावा की फेमस यूट्यूबर अश्वी यादव, उनका भाई शिवम यादव और बड़ी बहन नीतू यादव को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।
मामला कोई करोड़ों का नहीं, कोई ब्रांड डील का नहीं, बल्कि पूरे ₹30 (तीस रुपये) का है — जी हां, वही तीस रुपये जो अक्सर लोग ऑटो वाले को छोड़ देते हैं।
क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार,
अश्वी यादव ने एक परचून की दुकान से
10 किलो आशीर्वाद आटा
और कुछ अन्य सामान खरीदा
दुकानदार को ₹1000 दिए गए, लेकिन जल्दबाज़ी में ₹30 वापस लेना भूल गईं।
अब कहानी में ट्विस्ट यहीं से शुरू होता है
कुछ देर बाद
₹30 वापस लेने के लिए ₹100 का पेट्रोल फूंककर
दीदी जी दुकान पर दोबारा पहुंचीं
और दुकानदार से बोलीं—
“आपने मेरे 30 रुपये वापस नहीं किए!”
दुकानदार का जवाब था—
“मैडम, मैंने आपको पैसे लौटा दिए थे!”
बस फिर क्या था…
₹30 का विवाद → बहस → हाथापाई → सीसीटीवी रिकॉर्डिंग
CCTV बना ‘सबूत मियां’
पूरी घटना दुकान में लगे CCTV कैमरे में रिकॉर्ड हो गई थी।
वीडियो 2 दिन पहले वायरल हुआ और सीधा पुलिस के संज्ञान में चला गया।
नतीजा यह हुआ कि—
दीदी जी
भाई साहब
बड़ी बहन
तीनों ‘रील’ से निकलकर ‘रीमांड’ तक पहुंच गए
₹30 बनाम 1.5 मिलियन फॉलोअर्स
सोचने वाली बात यह है कि—
सोशल मीडिया पर 1.5 मिलियन फॉलोअर्स
लग्ज़री लाइफ, ब्रांडेड कपड़े, रील्स में रॉयल स्टाइल
और असल ज़िंदगी में… ₹30 की लड़ाई में जेल यात्रा
कहते हैं ना—
“रील की रॉयल लाइफ और रियल लाइफ का हिसाब-किताब अलग होता है।”
यह मामला मज़ेदार ज़रूर लगता है, लेकिन इसके पीछे एक बड़ा संदेश छुपा है—
क्या छोटी-सी बात को अहंकार का मुद्दा बना लेना सही है?
क्या सोशल मीडिया फेम आपको कानून से ऊपर बना देता है?
क्या गुस्से में लिया गया फैसला ज़िंदगी भर का पछतावा बन सकता है?
₹30 का यह विवाद साबित करता है कि
छोटी चिंगारी भी आग बन जाए तो
फॉलोअर्स, फेम और फिल्टर—
सब धुएं में उड़ जाते हैं।
सबक साफ है:
पैसा छोटा हो या बड़ा,
दिमाग ठंडा और जुबान मीठी रखें,
वरना अगली रील थाने के बाहर बनानी पड़ सकती है।
आवश्यक जानकारी _ FIR का असली आधार सामने आया
इस पूरे मामले में FIR से जुड़ी एक अहम जानकारी सामने आई है। दर्ज FIR दुकानदार की तहरीर पर दर्ज की गई है।
FIR के अनुसार आरोप यह है कि सामान खरीदने के बाद पैसा नहीं दिया गया, जबरन गुंडई की गई, कार में तोड़फोड़ की गई, दुकान में तोड़फोड़ और लूटपाट हुई। FIR में कहीं भी ₹30 के लेनदेन का उल्लेख नहीं है।
यह जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सुभाष चौधरी नाम के हैंडल से सार्वजनिक रूप से साझा की गई है।
इस मामले में एक और बड़ा तथ्य सामने आया है। शुरुआती स्तर पर कार्रवाई न करने को लेकर संबंधित थाने के एक कांस्टेबल के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया गया है। यानी पुलिस की भूमिका पर भी सवाल खड़े हुए हैं।
यह स्पष्ट है कि मामला केवल सोशल मीडिया पोस्ट तक सीमित नहीं है। FIR का आधार अलग है और सोशल मीडिया पर फैली ₹30 वाली कहानी FIR का हिस्सा नहीं है। तथ्यों के भ्रम ने पूरे प्रकरण को भटका दिया। जांच का केंद्र अब कथित मारपीट, तोड़फोड़ और पुलिस की निष्क्रियता है।
रिपोर्ट अनुप कुमार निषाद कानपुर नगर











